Month: September 2020
भाव-लिंग / पंचम काल
पंचम काल के अंत तक भाव-लिंगी मुनि होंगे । अज्जसि त्रियण सुद्धा (1. मोक्ष पाहुण गाथा) 2. तत्वानुशासन – श्लोक 83 स्व. पं श्री रतनलाल
श्रद्धा / अनुभव
श्रद्धा – मेरा डॉक्टर/धर्म ठीक कर देगा, अनुभव – मेरा डॉक्टर/धर्म ही ठीक कर पायेगा । यदाकदा(जब बीमारी असाध्य/पापोदय तीव्र हो) ठीक ना हो पायें
देव / मनुष्य
देव आयुबंध बेहतर है, मनुष्य आयुबंध से क्योंकि देव आयुबंध होने पर भी व्रत ले सकते हैं, मनुष्य आयुबंध के साथ नहीं । मनुष्य गति
Mind / Matter
All the problems are stuck between ‘Mind’ & ‘Matter’. If you don’t ‘Mind’, it doesn’t ‘Matter’. (???? Pranjal ????)
मूर्ति सचित्ताचित्त
मूर्तियों में मुनियों के द्वारा दसों प्राणों की प्रतिष्ठा तथा सूरिमंत्र देकर सचित्त किया जाता है, जैसे आटे के मुर्गे को सजीव मानकर उसे काटा
स्वस्थ
स्व स्थित: स्वस्थ: जो अपने में स्थित है, वही स्वस्थ है । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
विसंयोजना
अनंतानुबंधी की विसंयोजना चारौं गतियों में होती है । कषायपाहुड़ – II पेज 220 & 232 स्व. पं श्री रतनलाल बैनाड़ा जी
पुरुषार्थ
महामारी की वज़ह से मंदिर बंद/ पूजादि कर नहीं पारहे हैं । लेकिन TV पर देखकर continue रक्खें, कहीं आदत ही न छूट जाय ।
परिग्रह
4 पाप बिना इच्छा के भी हो सकते हैं जैसे चींटी का पैर के नीचे आना, इसलिये ज्यादा दोष नहीं बताया । लेकिन परिग्रह बिना
उत्तम ब्रम्हचर्य धर्म
ब्रम्हचर्य >> ब्रम्ह = आत्मा + चर = आचरण/ रमण । 1) चाम…सारहीन/ चाम पर दृष्टि से काम उत्पन्न । यह तन पाय महा तप
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