Month: February 2025

भगवान के नाम के आगे 1008

भगवान के नाम के आगे 1008 लगाने के कई कारण हैं… 1) इंद्र जब भगवान का प्रथम दर्शन करता है तो 1008 आँखें बना लेता

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समता

युवा तथा वृद्ध तपस्या में लीन थे। एक देव आये, दोनों ने जिज्ञासा रखी कि हमको मोक्ष कब होगा ? देव… वृद्ध तपस्वी तीन भव

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निस्पृहता

आचार्य श्री विद्यासागर जी ने 4 साल की मेहनत के बाद मूकमाटी महाकाव्य की रचना की। एक व्यक्ति आया (जो मुनियों पर श्रद्धा नहीं रखता

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बदलाव

सुकून भी ढूँढना पड़े तो इससे बड़ा और कोई दर्द नहीं…! यदि तुम में खुद को बदलने की हिम्मत नहीं, तो तुम्हें भगवान या किस्मत

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वैरागी भरत

भरत वैरागी थे, पर कौन से भरत बड़े वैरागी थे ? देखा जाए तो राम के भाई भरत बड़े वैरागी थे। कैसे ? अयोध्या का

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विवाह

विवाह विषयों के निमंत्रण के लिये नहीं, नियंत्रण के लिये। विवाह दवा है, इसे भोजन मत बनाना। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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शरीर और आत्मा का प्रभाव

भगवान जब जन्म लेते हैं एक समय के लिए नारकियों को भी साता हो जाती है। लेकिन भगवान के केवली समुद्घात जो प्रत्येक दिन एवरेज

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भरोसा

ईश्वर को आखिरी उम्मीद नहीं, पहला भरोसा बनाइये। मुनि श्री अविचलसागर जी

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खादी

खादी बनाना करुणानुयोग का विषय है। कैसे ? खादी बनाना भी गणितीय विषय(ताना-बाना बुनते) है। (जो करुणानुयोग का स्वाध्याय है और संवेग का विषय है)।

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स्व / पर

दो प्रकार के लोग → 1. स्वस्थानिक – जो अपनी आत्मा में रहते हैं। बड़ों से पूछो → कहाँ रहते हो ? जबाब – ग्वालियर,

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मंगल आशीष

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