Month: May 2025
आहार
मनुष्य का विकास सिर्फ़ भोजन से ही नहीं, आहार वर्गणाओं से भी होता है। अच्छे विकास के लिए प्रसन्न रहना तथा प्रशस्त नोकर्म वर्गणाएँ ग्रहण
अनुभूति
ऐसी स्वानुभूति करो कि किसी की सहानुभूति की आवश्यकता ही न रह जाये। आचार्य श्री विद्यासागर जी (आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी)
रागी देवी देवता
आगम में दोनों तरह के दृष्टांत आते हैं। जिसमें रागी देवी देवता तीर्थंकर की रक्षा में निमित्त बने और तिर्यंच ने मुनिराज की रक्षा करते
साधु / स्वादु
साधु को स्वादु होना चाहिए। जैसा भी मिले स्वाद लेकर खाना चाहिए। मुनि श्री मंगलानंद सागर जी
अभिवादन
अभिवादन… जयजिनेंद्र – पारस्परिक। नमोस्तु — एक तरफा। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4 मार्च)
बड़ा पापी
बड़ा पापी वह, जिसके मन से पश्चाताप का भाव ही समाप्त हो जाए। पश्चाताप से ही प्रायश्चित ग्रहण होता है। ब्र. (डॉ.) नीलेश भैया
अच्छी निद्रा
सोते समय मस्तक पूर्व दिशा में रखना चिंता मुक्त करता है। यह श्रमणों के लिए विशेष उपयोगी है। श्रावकों के लिए दक्षिण में मस्तक रखने
मति
ना “श्री” भटकाती है, ना ही “श्रीमती”, बस “मति” भटकाती है। आचार्य श्री विद्यासागर जी (आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी)
माला फेरना
माला फेरने में मन नहीं लगता क्या करें ? माला फेरने के तरीके बदलें – मानसिक, वाचनिक, उपांशु(होठ चलाना), श्वाच्छोसवास के साथ णमोकार पढ़ना। सांस
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