Month: May 2025
प्रभावना / पूजा
50 लोग पूजा करें या विहार में चलें, प्रभावना किसमें ज्यादा होगी ? 1. पूजा में स्वयं को पुण्यादि। 2. विहार में पुण्यादि + प्रभावना,
गूंगा कौन ?
जो प्रिय वचन नहीं बोलता, वह गूंगा है। ज़ुबान दो काम करती है ••• रस लेने का और बोलने का भी। ख़ुद रस लेने के
द्रव्य भी आदरणीय
समवसरण में पहले गुणस्थान वाले द्रव्यलिंगी मुनि भी 13वें गुणस्थान वाले मुनियों के कोठे में बैठते हैं। ऐसे ही श्रावक 5वें गुणस्थान तक के साथ-साथ
समस्या और समाधान
समाधान नहीं ढूंढ पाने पर वे समस्या बन जाते हैं। क्योंकि समाधान और समस्या दोनों ही एक स्थान पर रहते हैं। जन्म मरण भी प्राय
अर्धनारीश्वर
अर्हन्त भगवान के 1008 नामों में से एक नाम अर्धनारीश्वर भी है यानी जिन्होंने आधे कर्मों (4 घातिया) का नाश कर लिया है। अन्य मतों
व्यसन
व्यसन (चोरी भी व्यसन है, हालांकि इसे पांच पापों में गिना जाता है) त्याग में दक्ष कौन ? सर्वथा त्यागी, यानी मुमुक्षु (मोक्ष सिर्फ चाहता
अनध्यवसाय
अनध्यवसाय••• इच्छा का न होना, आगम की दृष्टि में अच्छा नहीं माना जाता है, अध्यात्म में अच्छा मानते हैं(मन में ऊहापोह न होना)। मुनि श्री
पुरुषार्थ / भाग्य
पुरुषार्थ—> जन्म लिया है तो उड़ना तो होगा ही (वरना हिंसक जीव घात कर देंगे)। भाग्य—> अंत में धरातल पर आना(मरण) भी निश्चित है। चिंतन
निधत्ति और निकाचित कर्म
क्या निधत्ति और निकाचित कर्म भक्ति और अदान को भी प्रभावित करते हैं? योगेन्द्र हाँ, ये कर्म पुण्य तथा पाप दोनों प्रकृतियों को प्रभावित करते
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