Month: September 2025
दसलक्षण में धर्म
बहुत से लोग दसलक्षण में ही धर्म करते हैं, फायदा ? यदि अभिप्राय धर्म सीखना है तब तो पूरा फायदा है। हाँ ! सिर्फ़ दस
Independent
Independent बनने के लिए बिटिया लोगों को कितनों की Dependency सहनी पड़ती है। कई बार तो अपमानजनक स्थिति का भी सामना करना होता है (विशेष
स्वर
नाक के बायीं साइड से जो स्वर चलता है, उसे चंद्र-स्वर कहते हैं। यह दिन में चलने वाला स्वर है। रात्रि में दायीं साइड से
जिंदा
जो दूसरों को जिंदा न रहने दे, उसे जिंदा नहीं कह सकते/ उसे जिंदा रहने का अधिकार नहीं। 2) जो गुरु/ भगवान के सामने अकड़ा
आवश्यक / अनायतन
6 आवश्यक, सम्यग्दर्शन पाने के लिए; 6 अनायतन, मिथ्यादर्शन से बचने के लिए। मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 15 जून) (आवश्यकों का पालन
धर्म
धर्म स्व-आश्रित ही नहीं, पर निमित्तक भी है। साधुजन भी गृहस्थों की भोजन व्यवस्था लेते हैं। काया के आश्रित तो साधु तथा गृहस्थ दोनों रहते
वैराग्य
पं.सहजानंद जी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा –> आपको वैराग्य कैसे हुआ ? आचार्य श्री –> भगवान/ गुरु के राग से। पं.जी ने
सच्ची मिठास
ना काफ़ी (मिठास), नाही फीका, सच्ची मिठास प्राकृतिक। काफ़ी मिठास – जलेबी में पर मायाचारी का प्रतीक, फीका मिठास – रसगुल्ले में पर मिलावटी (पनीर
सिद्धांत-ग्रंथ
सिद्धांत-ग्रंथ उनको कहते हैं जिनका भगवान की देशना से सीधा संबंध हो। तत्त्वार्थ-सूत्र तो सिद्धांत-ग्रंथों की कुंजी है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान
इच्छा / परिणाम
मैं बुद्ध होने उठा, आशा ही दुःख का कारण है, सोचकर सो गया। मुझसे वक़्त (समय) पूछा किसी ने, बुरा चल रहा है। मैंने चाहा
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