Month: November 2025
पुरुष की स्पर्श क्षमता
पुरुष मनुष्य-लोक के हर भाग को स्पर्श कर सकता है। ऋद्धिधारी मुनियों से मनुष्य-लोक का कोई भाग अछूता नहीं रह जाता, स्त्री नहीं कर सकतीं
शोर
बनता* चुपचाप है, टूटता आवाज़ के साथ है। इस संसार में आवाज़ ही आवाज़ है। गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी * निर्माण।
मानुषोत्तर पर्वत
मानुषोत्तर पर्वत पुष्कर-द्वीप के ठीक मध्य में नहीं है। बल्कि मनुष्य-लोक का आधा भाग निकल जाने/ पूरा हो जाने के बाद में है (मनुष्य की
आदर
न्यूनतम अनादर (दुश्मन/ सूक्ष्म जीवों का भी) करने वाला ही अधिकतम आदर का पात्र होता है। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
Self-dependent / Independent
Self-dependent/Independent तो दो ही हैं… एक सिद्ध भगवान और दूसरा आकाश द्रव्य। मुनि श्री सौम्य सागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र-अध्याय 3 – अगस्त 30)
पढ़ाई
ज्यादा पढ़े तो घर से जाये, कम पढ़े तो हल* से जाए। *खेती के काम के नहीं, ज्ञान बिना खेती कैसे होगी ! निर्यापक मुनि
आस्रव / संवर
आचार्य श्री विद्यासागर जी का एक चिंतन… जैसे आस्रव का निरोध संवर है वैसे ही यह भी कहा जा सकता है कि संवर का निरोध
मनुष्यों के भेद
मनुष्यों की श्रेणियाँ… कंजूस – मेरा 1 रुपया खर्च न हो, दूसरे के चाहे हज़ारों। संतुलित – मैं भी खर्च करूँ, दूसरे को भी करने
ज्ञान
कहा जाता है कि अकेला एक ज्ञान “केवलज्ञान” होता है। लेकिन विशेष परिस्थितियों में मतिज्ञान भी अकेला रह सकता है जैसे शिवभूति मुनिराज को णमोकार
पद / प्रतिभा
पद मिले, प्रतिभा न रहे तो धृतराष्ट्र बनते हैं। प्रतिभा रहे, पद न मिले तो कर्ण। (सुरेश – इंदौर)
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