Day: February 19, 2026

असंयम

जितना राग, उतना द्वेष। इंद्रिय असंयम से ही प्राणी असंयम जैसे द्विदल से। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/01)

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सांस

सांस ही जीवन है। जितनी अधिक सांस व्यय करेंगे उतना जीवन नष्ट होगा। यदि प्राणायाम नहीं कर सकते तो लम्बी-लम्बी गहरी सांस लें। निर्यापक मुनि

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मंगल आशीष

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