दु;ख में भगवान
तीव्र मिथ्यादृष्टि दु:ख में भी धर्म से दूर रहता है जैसे बीमारी में कोई डॉक्टर से दूर भागता हो या बच्चे इंजेक्शन से यह समझें कि डॉक्टर मुझे दर्द देने आया है।
जबकि सम्यग्दृष्टि दु:ख में भगवान की और करीब आ जाता है।
प्रवचन आर्यिका श्री पूर्णमति माता जी (24 जनवरी)
(मंद मिथ्यादृष्टि दु:ख में ही भगवान को याद करता है जबकि सम्यग्दृष्टि सुख में भी याद करता है)।




One Response
आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने दुख मे भगवान् को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सम्यग्द्बष्टि में भगवान् को याद करना परम आवश्यक है।