संसारी संकल्प लो तो घने विकल्प होते हैं,
धार्मिक संकल्प लो तो विकल्प समाप्त होते हैं ।

लोहा यदि पड़ा रहे तो जंग लग जाती है ।
उसे तपाकर यदि उसकी सुई/चाबी बना ली जाये तो, जोड़ने/गुंथियों के ताले खोलने जैसी उपयोगी चीजें बन जाती हैं और जंग भी नहीं लगती ।

मि. फोर्ड़ (प्रसिद्ध कार कंपनी के मालिक) अमेरिका में बड़े सादगी से रहते थे, कपड़े भी बहुत सामान्य से पहनते थे, उनका दोस्त हमेशा उन्हें टोकता रहता था कि सूट-बूट में टिप-टॉप रहा करो । किन्तु वो ना मानते और कहते कि “मुझे यहाँ कौन नहीं जानता कि मैं फोर्ड़ हूँ, सो कुछ भी पहनने से क्या फ़र्क पड़ता है ?” एक बार वह अमेरिका से बाहर जा रहे थे तो उनके दोस्तों ने एक मंहगा सूट लाकर दिया । तो फोर्ड़ बोले – “कि मुझे वहाँ कौन जानता है सो मैं वहाँ टिप-टॉप सूट पहनकर जाऊँ ?”

सादगी हमें और ऊपर उठाती है ।

(श्री धर्मेंद्र)

एक भक्त ने भगवान से कहा –
मैं आपसे मिलना चाहता हूँ ।
भगवान – जब चाहो मिल लो, मेरे दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं ।
भक्त – पर मैं आपको पहचानुंगा कैसे ?
भगवान – अपने आप को पहचान लो, बस मुझे पहचानने में दिक्कत नहीं आयेगी ।

(शशि)

किसी की सहायता करते समय सोचो – “यह उसका आखिरी दिन है”
ताकि अधिक से अधिक और मन से कर सको ।
सहायता करने के बाद सोचो – “यह मेरा आखिरी दिन है”
ताकि बदले में लेने का भाव ना आ जाये ।

चिंतन

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