पाप
पाँच प्रकार के पापों का फल उत्तरोत्तर अधिक-अधिक है-
हिंसा से ज्यादा झूठ का क्योंकि इसमें हिंसा भी आ जाती है।
ऐसे ही चोरी, कुशील, परिग्रह।
यानी परिग्रह सबसे बड़ा तथा इसमें पाँचों पाप समाहित हैं।
मुनि श्री विनम्रसागर जी
पाँच प्रकार के पापों का फल उत्तरोत्तर अधिक-अधिक है-
हिंसा से ज्यादा झूठ का क्योंकि इसमें हिंसा भी आ जाती है।
ऐसे ही चोरी, कुशील, परिग्रह।
यानी परिग्रह सबसे बड़ा तथा इसमें पाँचों पाप समाहित हैं।
मुनि श्री विनम्रसागर जी
One Response
पाप का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए पापो का त्याग करना परम आवश्यक है।