Month: May 2026

श्रावक

आचार्य श्री विद्यासागर जी के दर्शन करने एक धनाड्य व्यक्ति आये। आचार्य श्री –> सेठ जी आ गये ? सेठ –> सेठ नहीं महाराज, भक्त।

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कर्म-बंध

गाड़ी आगे चले या पीछे ईंधन तो खपेगा ही। सुकर्म करें या दुष्कर्म, कर्म तो बधेंगे ही। गाड़ी आगे जाने पर गंतव्य पहुँचोगे, पीछे जाने

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नय

संसार दोनों नयों से चलता है। नित्य/अनित्य, व्यवहार (भेदरूप)/निश्चय (अभेदरूप)। काना (एक आँख वाला) अपशकुन माना जाता है, मिथ्यादृष्टि। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी

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स्वभाव

दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं… पहले… भूमि पर उगे बरगद की तरह जो सबको छाया आदि देते हैं। दूसरे… उस बरगद जैसे जो दीवार

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द्रढ़ता

जिनके अंदर दृढ़ता होती है, वे ही देशव्रत/महाव्रत ले पाते हैं और उन्हें पाल पाते हैं। पर यह भी देखा गया है कि कुछ लोग

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बुढ़ापा

लाना पड़ता है मन का बुढ़ापा आता कभी ना मुनि श्री निराकुलसागर जी

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अरिहंत के निर्जरा

13वें गुणस्थान में आखिरी अंतर्मुहूर्त को छोड़कर कथंचित सविपाक निर्जरा ही मानी जायेगी। चिंतन

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चोरी

आर्यिका विशालमति, जो आर्यिका विज्ञानमति से ज्येष्ठ हैं, ने उनसे ब्रम्हचर्य पर कुछ लिखने को कहा। बड़ी माताजी की प्रेरणा और सलाह से उन्होने ‘शीलमञ्जूषा’

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पुद्गल विपाकी

अगुरूलघु, उप/पर घात, रसादि, आतप, उद्योत, प्रत्येक/ साधारण, शुभ/ अशुभ, स्थिर/ अस्थिर आदि 62 प्रकृतियाँ पुद्गल विपाकी हैं। ऐसे चिंतन से रागद्वेष कम होता है

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समाधि

समाधि कब ? जब इंद्रियाँ शिथिल होने लगें पर मन में उत्साह बना रहे। उत्साह कैसे बनाये रखें/ बढ़ायें ? भगवान/ गुरुओं का जय-जयकार करके।

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मंगल आशीष

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May 31, 2026