राजा को चंदन की लकड़ी में, रंक को कंडों में जलाया जाता है ।
पर दोनों की राख एक सी, न चंदन वाली में सुगंध, न ही कंडों वाली में दुर्गंध ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

????????????????????????
मौत के डर से ही सही,…..
ज़िन्दगी को फुर्सत तो मिली…..
सड़कों को राहत…….
और घरों को रौनक तो मिली….
प्रकृति, तेरा रूठना भी ज़रूरी था…
इंसान का घमंड टूटना भी ज़रूरी था..
हर कोई ख़ुद को ख़ुदा समझ बैठा था..
ये शक दूर होना भी ज़रुरी था..!
????????????????????????

जानवर दूसरों के बच्चों का निवाला छीनकर अपने बच्चों को नहीं खिलाते। हिंसक जानवर भी एक जानवर को मार कर कई दिनों तक शिकार नहीं करते।

सिर्फ़ आदमी ज़िंदगी भर सुबह से शाम दूसरों का निवाला छीन-छीन कर अपना तथा अपने बच्चों का भरण-पोषण करता है।

चिंतन

Archives

Archives

April 8, 2022

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31