लोभ अदॄष्य पिंजरा है,
इसमें एक बार फंसे तो हमेशा के लिये कैद हो जाओगे ।

अच्छा इंसान फूल की तरह होता है,
जिसे  हम छोड़ भी नहीं सकते और तोड़ भी नहीं सकते,
तोड़ दिया तो मुरझा जायेगा और छोड़ दिया तो कोई और ले जायेगा ।

(ड़ा. अमित)

4 वर्षीय देवांशी जैन को उसके मामा ने 100 रू. का नोट भेंट किया ।
देवांशी ने नोट को उल्टा पकड़ा और वापिस करते हुये कहा – मुझे बुद्धु बना रहे हो, ये तो 001 का नोट है ।

संसार और परमार्थ की चीजें हमेशा एक दूसरे की उल्टी होती है ।

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April 8, 2022

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