जीवन में तो माता-पिता को पानी नहीं पिलाते, मरने पर गंगा में सिराने(बहाने) बड़े ठाटबाट से जाते हैं ।

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

घड़ी लगातार टिक टिक करती रहती है, पर क्या टिक टिक की आवाज़ पर कोई गौर करता है !
पर घंटों की आवाज़ पर हर कोई गौर करता है ।

बच्चों आदि को हर समय नहीं टोकना चाहिए वरना वे आपकी बातों पर ग़ौर नहीं करेंगे ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

गले में खराशें पड़ने पर नमक के गरारों से फायदा होता है ।
पर खराशें बहुत बढ़ जाने पर/छालों का रूप ले लेने पर वही नमक का पानी बीमारी बढ़ा देता है ।

बच्चों को बचपन में care/मोह सहायक होता है, बड़े होने पर हानिकारक ।

चिंतन

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