जब सब कहने लगें कि – “आप किसी काम के नहीं” ।
तब मानिए, आप अपने काम के हो गये हैं ।

श्री लालमणी भाई

गले में खराशें पड़ने पर नमक के गरारों से फायदा होता है ।
पर खराशें बहुत बढ़ जाने पर/छालों का रूप ले लेने पर वही नमक का पानी बीमारी बढ़ा देता है ।

बच्चों को बचपन में care/मोह सहायक होता है, बड़े होने पर हानिकारक ।

चिंतन

दुकान खोलते हैं ताकि ग्राहक ज्यादा आयें/फायदा ज्यादा हो ।

पूजापाठ क्यों करते हैं ?
भगवान बनने के लिये या श्रीमान बनने के लिये ?

आचार्य श्री विद्यासागर जी

मशाल बनें, जो स्वंय प्रकाशित होती है तथा दूसरों को भी प्रकाशित करती है ।
कम से कम, गीली लकड़ी ना बनें जो खुद भी प्रकाशित नहीं हो पाती और दूसरों की आंखों में प्रकाश की जगह धुंआ देती है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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