जो जाई को भावता,
सो ताई के पास ।

श्री लालमणी भाई

झींगुर उल्टा पड़ा हो तो बहुत पुरूषार्थ करने पर भी सीधा नहीं हो पाता ।
जरा सा निमित्त मिल जाये, ज़रा से सहारे से सीधा होकर भाग जाता है, अपने बिल में घुस जाता है ।

चिंतन

पूज्यों/बड़ों/गुणवानों के चरणों में सिर झुकाने की परम्परा इसलिये है क्योंकि अपने यहाँ चारित्र की प्रमुखता है ।
चरण आचरण के प्रतीक होते हैं, सिर ज्ञान का प्रतीक है ।
ज्ञान को चारित्र के आगे झुकाने की परम्परा  है ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031