ड़ाँटो उसे जो, उल्टा न ड़ाँटने लगे,
प्यार उसे करो, जो उल्टा आपको प्यार करे,
समझाओ उसे, जो उल्टा आपको न समझाने लगे ।

चिंतन

जब खर्च कर रहे हो तो मान के चलिए कि पुण्य की कमाई है,
और जब दान दे रहे हो तो मान के चलिए कि पाप की कमाई है,
सो दिल खोल के दान दें ।

मुनि श्री सुधासागर जी

आलोचक कैंची हैं जो बस काटते ही रहते हैं ।
प्रशंसक सुई हैं जो सिलते/जोड़ते रहते हैं ।
कैंची को दर्जी पैरों में रखता है, सुई को पगड़ी में रखता है ।
आप कहाँ रहना चाहते हो ?

मुनि श्री तरुणसागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031