भक्त से भगवान…
भगवान के सामने बोलो/ अनुभव करो… “दासोहम्”।
अगले कदम पर “उदासोहम्” (संसार से)।
अंत में… “सोहम्”।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

सोलर पैनल जैसे होते हैं गुरु। अपनी Energy ख़ुद पैदा करते रहते हैं। फ़र्क यह है कि इनकी Energy रात/ सोते में भी चार्ज होती रहती है तथा शिष्य रूपी ग्रिड को भी Energy देते रहते हैं।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे, “पाप मल है, पुण्य जल है। मल धोने के लिए जल आवश्यक है।”

आचार्य श्री समयसागर जी

विचारों की यदि दिशा भटक जाए तो वह विकार बन जाते हैं।
एक बुढ़िया की कुटिया पड़ोसी ने हड़प ली। बुढ़िया ने निवेदन किया कि एक डलिया मिट्टी ले जाने दें ताकि उसकी खुशबू से परिवार सो सके। डलिया भारी थी पड़ोसी को निवेदन किया सिर पर रखवा दें। पड़ोसी उठा नहीं पाया।
बुढ़िया –> एक डलिया मिट्टी का बोझ नहीं उठा पा रहे हो, पूरी जमीन की मिट्टी का बोझ कैसे सहन कर पाओगे !

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

पुरुषार्थ पहले या भाग्य ?

सुभाष

भाग्य से ही पुरुषार्थ कर पाते हैं। तब और ज्यादा अच्छा भाग्य बन जाता है,
फिर ज्यादा पुरुषार्थ कर पाते हैं।
जैसे पूँजी (भाग्य) लगाने से व्यवसाय (पुरुषार्थ)।
पूँजी बढ़ती जाती है, साथ-साथ व्यवसाय भी।

चिंतन

कुम्हार अपने 5 गधों पर 5 सामग्रियाँ Overload करके रोज़ाना बेचने जाता था।

    • अत्याचार –> राजा आदि के लिए।
    • अहंकार –> सेठ आदि, नये धनपतियों के लिए।
    • ईर्ष्या –> नये पण्डितों/ ज्ञानियों के लिए।
    • बेईमानी –> व्यापारियों के लिए।
    • छल-कपट/ मायाचार –> महिलाओं के लिए।

खरीदने वाले हम ही तो हैं।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

कार के टायर के नीचे आने से पैर कुचल गया।
पर टायर तो रबड़ का और रबड़ मुलायम ?
हवा भर दी सो कठोर हो गया।

मनुष्य में भी हवा भर दो तो वह कठोर हो जाता है। अन्यथा उसका स्वभाव तो
कोमल/ विनम्र होता है।

चिंतन

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