ज़िन्दगी में दो लोगों का बहुत ख्याल रखना –
- वो जिसने तुम्हारी जीत के लिये बहुत कुछ हारा हो – पिता
- वो जिसको तुमने हर दु:ख में पुकारा हो – माता
(श्री मेहुल )
किसी मकान में पूरी ज़िन्दगी बिना मरम्मत के रहने का आपको हक है ?
फिर इस शरीर को बिना सात्विक क्रियायों के और पौष्टिक आहार दिये बिना Full Term कैसे जी सकते हो ?
चिंतन
Difference between Truth & Life –
Truth is a debit card: Pay first & Enjoy later.
Life is a credit card : Enjoy first & Pay later.
(Mr. Dharmendra)
हल्दी, खांसी आदि कई बीमारी ठीक करती है पर सारे मसालों में सबसे पहले खराब होती है, उसे घुन जल्दी लगता है ।
जो दूसरों को ठीक करने में लगे रहते हैं,
वे यदि सावधानी ना बरतें तो खुद जल्दी ही खराब हो जाते हैं, अभिमान आने की बहुत संभावना रहती है ।
चिंतन
Half of sorrows we earn by expecting good things from wrong people,
And half of sorrows we earn by expecting wrong things from good people.
मांग कर पहने हुये गहनों पर गर्व कैसा ?
यह सब वैभव “पुण्य रूपी” साहुकार से मांग कर लाये हो,
जिस दिन वह मांग बैठेगा, सब वापस करना पड़ेगा ।
Do good to everyone without expecting much……
As an old proverb says : Some fragrance always cling to the hands of those who distribute roses.
(Dr.Amit Jain)
Read this slowly –
‘GODISNOWHERE’
What did you read ?
God is no where,
Or
God is now here !
Just a beautiful line to say – “Life depends on the way we look”.
(Mrs. Apoorva)
हम अंधेरे पर क्यों झल्लायें,
अच्छा हो कि दीप जलायें ।
Treat everyone with LOVE,
Even those who are rude to you,
Not because they are not nice,
But because you are nice.
(Ku. Pranshi)
एक बूढ़ी अम्मा की सुई, सिलाई करते हुये अंधेरे कमरे में कहीं खो गयी ।
वह बाहर Street Light में जाकर सुई ढ़ूंढ़ने लगी ।
सब लोग भी उसके साथ ढ़ूंढ़ने लगे ।
किसी ने पूछा कि सुई खोई कहां थी ?
कमरे में ।
तो बाहर क्यों ढ़ूंढ़ रही हो ?
क्योंकि कमरे में Light नहीं है, बाहर Light है ।
क्या हम सब खुशियाँ बाहर नहीं ढ़ूंढ़ रहे हैं ?
जबकि खुशियाँ अंदर ही हैं ।
4 Beautiful thought of life —
Look back & see our Karm,
Look forward think about Gati (next janma/future),
Look around & find Reality,
Look within & meditate Atma.
(Mr.Sanjay)
यदि भोगना ही है तो धर्म करते हुये भोगो ।
जैसे वृक्ष के फल तोड़कर खाना – धर्म,
वृक्ष काटकर फल खाना – अधर्म ।
Be grateful that you don’t have everything you want.
It means that you still have an opportunity to be happier tomorrow than you are today !
(Mr. Asheesh Mani)
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