पसीना दो तरह का –
1. कसरत करने से शरीर के लिये लाभदायक ।
2. तप करने से आत्मा के लिये लाभदायक ।

चिंतन

आत्मा को भार* नहीं, आभार** मानो ।

* भार मानने वाले आत्मघात तक कर लेते हैं ।
** कितना उपकार कि आत्मा हमें मोक्ष-मार्ग पर लगाने में निमित्त है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

जग प्रशंसा करे तो गुण, ख़ुद को बताना पड़े तो अवगुण ।
अवगुणीं तुम्हारे गुणों को स्वीकार नहीं कर पायेंगे;
गुणीं पचा नहीं पायेंगे ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

भगवान भारत में ही क्यों ?
इस धर्म/संस्कृति की फसल के लिये ये ही वातावरण अनुकूल है ।
जैसे चाय के लिये आसाम, सेव के लिये कश्मीर ।
बाहर का वातावरण संसार बढ़ाने के लिये या कहें संसार किसी भी वातावरण में फलफूल सकता है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

ट्रेन में 2 यात्रियों में झगड़ा मारपीट तक पहुंच गया ।
एक खिड़की बंद करता उसे सर्दी लग रही थी, दूसरा खोल देता क्योंकि उसे गर्मी ।
TTE को बुला लिया गया ।
TTE ने आकर देखा खिड़की में कांच ही नहीं था ।
झगड़ा सर्दी/गर्मी का नहीं, अहम् का था ।

(श्रीमति शर्मा)

विपरीतता प्रकृति का नियम है ।
प्रतिकूल वातावरण में अनुकूल की साधना ही सच्ची साधना है ।
हीरा कोयले की खान में ही ।
शंख/गाय किसी भी रंग का खाकर सफेद रंग का शरीर/दूध बनाते हैं ।

मुनि श्री महासागर जी

और यह साधना सम्भव होती है …गुरु कृपा से …
गुरु ?
माँ ही प्रथम गुरु है,
और
गुरु ही पूर्ण माँ … गुरु पूर्ण माँ

Nazim Hikmat the great Turk poet (Faiz was one of his admirers) once asked his friend Abidin Dino (Turkish artist and a well-known painter) to draw picture of happiness. Since then “Can you paint the picture of happiness for me, Abidin?” is a well-known phrase for Turks. This painting is famous. The whole family is cramped up on a broken bed under a leaked roof in a shabby room…

(Dr.P.N.Jain)

दही के बर्तन में बिना जामुन के दूध ऐसा जम जाता है कि जमा (जमाना) उल्टा कर दो तो भी ना गिरे ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

बिना संयम के काले बाल वालों पर भरोसा मत करना ;
Army area में Civilian का जाना वर्जित होता है ।
श्रावकों की सुनो मत/मानो मत, श्रमण को अपनी बात सुनानी चाहिये/श्रावकों से मनवानी चाहिये ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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