
(रेनू – नया बाजार मंदिर)
( “धागा” यानी सूत्र जिनवाणी/ भगवान की वाणी का – कमल कांत)
उन्नति आगे बढ़ना नहीं, ऊपर उठना है।
अवरोध आने पर पानी ऊपर उठता है।
हमारे जीवन में भी व्यवधान आयें तो उनको हटाने में अपनी शक्ति जाया न करें, उनको सीढ़ी बनाकर ऊपर उठें, तब ही उन्नति होगी।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 11 जून)
पॉजिटिव थिंकिंग यह नहीं कि “मैं कर ही लूंगा” बल्कि वह जिसका रियलिस्टिक थिंकिंग से तालमेल हो।
जैसे इंटरव्यू में “मैं क्लियर कर ही लूंगा” नहीं, मैं कंपनी के फायदे की सोचूँगा, सेलेक्ट हो गया तो कंपनी का फायदा, सेलेक्ट ना होने पर भी अफ़सोस नहीं बल्कि सोचूँगा, यह तो कंपनी का ही नुकसान हुआ !
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)
बीज को मुट्ठी में पकड़े रहने से उसकी सुरक्षा नहीं/ उसकी संतति नहीं।
माटी को मान देने से मान रूपी बीज जब अपना मान समाप्त कर देता है तब वह वृक्ष बनकर सबका सम्मान पाता है।
अपना मान मिटाने से ही सम्मान मिलता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)
पहला धन्यवाद परमात्मा को जो हमारे आदर्श और लक्ष्य है।
2) गुरु को जिन्होंने बताया परमात्मा कौन होते हैं और उन तक कैसे जाया जा सकता है।
3) माता-पिता को जिन्होंने साधन उपलब्ध कराये।
4) साधर्मी भाइयों को जिन्होंने उस रास्ते पर चलने में मेरा साथ दिया।
अंतिम स्वयं को कि आपने इन चार का लाभ उठाने का साहस किया।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)
मैच्योर/ पॉजिटिव थिंकिंग किस अवस्था में ?
मुनि अवस्था में।
रियलिस्टिक थिंकिंग किस उम्र में ?
ओल्ड/ वृद्धावस्था में। ऐसा व्यक्ति वृद्धाश्रम जाते समय भी कर्मसिद्धांत स्वीकार लेता है।
ऐसा कौन जो वृद्ध भी हो और महान संत भी ?
आचार्य श्री विद्यासागर जी।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 9 जून)
संसारी माँ बच्चों को लोरी सुलाने के लिये सुनाती है।
धर्म-माँ* बड़ों को जगाने के लिये।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
*जिनवाणी (धार्मिक ग्रंथ)/ गुरु-वाणी।
इस वर्तमान ऋतु में पित्त का प्रकोप बहुत होता है। उससे बचने के लिए खटाई (किसी भी तरह की चाहे वह नींबू की हो या कच्चे आंवले की। अगले माह में भी नहीं), उड़द, बीन्स, मिर्च/ मसाले, तेल नहीं लेना चाहिए। हाँ ! सूखा आंवला ले सकते हैं जो कसैला होता है।
गुड़, शीतल अनाज जैसे ज्वार, केले, अनार, लौकी लेना चाहिए।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 17 सितम्बर)
खाओ-पीओ, चखो मत;
देखो-भालो, तको मत;
हँसो-बोलो, बको मत;
खेलो-कूदो, थको मत।
मुनि श्री मंगलानन्दसागर जी
1) Urgent and Important……………. Do it.
2) Not Urgent but Important………..Delay.
3) Urgent but not Important…………Delegate.
4) Not Urgent and Not Important….Delete.
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 8 जून)
प्राय: दूसरों से अधिक से अधिक सुख लेना चाहते हैं। जैसे मिठाई मेरी थाली में है पर Common में से पहले और ज्यादा से ज्यादा लेना पसंद करते हैं/ लेते हैं।
अनात्मा की ओर ही लगे रहते हैं इसीलिये अपनी आत्मा की ओर आ नहीं पाते।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
प्रॉब्लम कंप्रोमाइज क्यों नहीं हो रही ?
कारण ?
एनालाइज नहीं किया, यदि एनालाइज किया भी था तो रियलाइज़ नहीं किया होगा। अगला कदम एक्सरसाइज, फिर भी कंप्रोमाइज नहीं हो रही तो मिनिमाइज हो ही जाएगी, जो अभी तक क्रिटिसाइज़ की जा रही थी।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 3 जून)
मेहमान ने 8 पूड़ी खाने के बाद बोला – बस! अब रहने दो, 8 पूड़ी हो गयीं।
मेजबान – वैसे तो 12 हो गयीं पर गिनता कौन है! और लें।
हमारा उपयोग ऐसा तो नहीं?
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
ध्यान आदि शुभ काम करते समय अशुभ भाव क्यों आते हैं और उनको दूर कैसे किया जा सकता है ?
पूरा समय मीठा खाने के साथ यदि कुछ खट्टा खा लिया तो डकार खट्टी आती है। ऐसे ही दैनिक जीवन के कामों में आये अशुभ भाव शुभ पर भारी पड़ जाते हैं।
समाधान… खट्टा खाना/ विकारी भावों से दूर रहें।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 3 जून)
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments