दर्पण में साफ देखना चाहते हो तो :-

  • उसे साफ रखना होगा यानि व्यसन रहित ।
  • स्थिर रहे यानि कषाय रहित ।
  • अनावरित रहे यानि ज्ञान आवरण रहित हो ।
  • देखने वाले कि आखें हो यानि वीतरागता/समता हो ।
  • प्रयास करें यानि चारित्रवान हो ।

करैया गांव में पंचकल्याणक हुआ । लालमणी भाई उस समय 10 वर्ष के थे और जलूस में हाथी पर बैठने की जिद करने लगे । हाथी पर बैठने के लिये 1000 रू. जमा कराया जा रहा था, जो उनकी दादी के पास नहीं थे फिर भी दादी ने 100 रू. दान दिये ।
पंचकल्याणक किसी वजह से रद्द हो गया और सबके पैसे वापिस कर दिये गये पर दादी ने 100 रू. वापिस नहीं लिये जबकि 1000 रू. वालों ने अपने पैसे वापिस ले लिये ।
दादी का कहना था कि आज मैं 1000 रू. दान नहीं कर पाई पर मुझे विश्वास है कि, ये 100, 100 रू. दान करते हुये जिस दिन 1000 रू. हो जायेंगे उस दिन मेरा नाती हाथी पर जरूर बैठेगा ।
जिन लोगों ने 1000 रू. वापिस ले लिये थे वे आज तक हाथी पर नहीं बैठ पाये और दादी का नाती बार-बार हाथी पर बैठा ।

श्री लालमणी भाई

आत्मा की आराधना छोड़ना अपराध है,
अपराध तभी होते हैं जब पंचेन्द्रियों के विषयों में लिप्तता अधिक हो जाती है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

भगवान कभी आज्ञा नहीं देते, वे सिर्फ बताते हैं ।
इसमें आज्ञा भंग होने का ड़र भी नहीं रहता ।
आज्ञा देना आसान है, मनवाना बहुत कठिन, मांगना बहुत सरल है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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