जीवन रूपी रथ के…
घोड़े – कर्म हैं,
पहिये – कर्मफल (धीरे/ तेज/ कीचड़ में धसना),
विवेक – सारथी (घोड़ों को optimum दौड़ाना पर थकाना नहीं; रथ को कीचड़ में न जाने देना ।

सुपथ पर चलोगे तो जीवन सरल, कुपथ पर हिचकोले लेगा ।

सत्यनिष्ठा की लौ पर,
रख दी सलीके से,
संयम की चिमनी;
प्रकम्पित न हो ताकि,
प्रलोभन की आंधी में ।

(गुरुवर मुनि श्री क्षमा सागर जी के प्रवचन से प्रेरित)..कमल कांत जैसवाल

यदि पहले तीनों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम) धर्मानुसार हैं तो मोक्ष-पुरुषार्थ तो होगा ही ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

कुत्ते की पूँछ सीधी करने का तरीका –
कुत्ते को बेस्वाद/कम भोजन दो (कमजोर हो जायेगा, पूँछ लटक जायेगी ) ।
मन/ विकारों को नियंत्रित करने का भी यही तरीका है ।

ना तो रात्रि में कुल्ला करें और ना ही बिना कुल्ला करे मंदिर में बोल कर अर्घ चढ़ायें (दुर्गंध न फैलायें)

मुनि श्री सुधासागर जी

विचार का चूहा,
मन के पटल पर,
उभरना चाहे,
बिल से झाँके,

ध्यान की बिल्ली,
निश्चल पाषाणवत्,
दृष्टि बिल पर केंद्रित,
ताक में बैठी,
घात लगाए,

चूहा डरे,
वापस बिल में,
घुस जाए,
विचार शृंखला,
बनने से पहले,
टूट जाए,

बिल्ली बैठी रहे,
यथावत् समाधिस्थ ।

कमल कांत जैसवाल – चिंतन

ज़िन्दगी का यह एक बहुत बड़ा रहस्य है…
हम जानते हैं कि हम किसके लिए जी रहे हैं,
लेकिन
ये कभी नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौन जी रहा है !

(सुरेश)

श्रद्धा – मेरा डॉक्टर/धर्म ठीक कर देगा,
अनुभव – मेरा डॉक्टर/धर्म ही ठीक कर पायेगा ।
यदाकदा(जब बीमारी असाध्य/पापोदय तीव्र हो) ठीक ना हो पायें तब भी श्रद्धा कम नहीं होनी चाहिये ।

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31