बच्चों और युवाओं को अधिक से अधिक सीखना चाहिए,
बुजुर्गों को अधिक से अधिक भूलना चाहिए ।

आर्यिका श्री विज्ञानमति माता जी

कामना-  – मन की इच्छाओं को प्रकट करना,
गुरु/भगवान से अपने/अपनों के लिये कुछ मांगना ।

प्रार्थना- – इष्ट के सामने अपनी लघुता को प्रकट करते हुये, शांत रहने/संकट से जूझने की सामर्थ पाने के उदगारों/गुणानुवादों की अभिव्यक्ति ।

शरीरों के स्वभाव अलग अलग –
मिट्टी व जल स्वभाव वाले एकमेव,
धातु लकड़ी को -काटेगी, अग्नि लकड़ी को -जलायेगी, विपरीत स्वभाव वाले ।
इसलिये किसी को सोने की माला लाभदायक, दूसरे को नुकसानदायक ।

मुनि श्री सुधासागर जी

भगवान महावीर के समय एक कसाई रोज़ भैंसे मारता था । श्रेणिक राजा ने उसे जेल में डाल दिया । पर जेल में भी वह अपने शरीर से मैल की बत्ती बना-बना कर उन्हें नाख़ून से काटता था, क्या उसे भाव हिंसा का दोष नहीं लगेगा ?
श्री राम वनवास में 14 वर्ष तक धर्म कैसे करते थे, जंगल में मंदिर/ पूजा की सामिग्री तो थी नहीं !
जब कसाई को भावों से पाप लगा तो श्री राम को/ आज की परिस्थिति में हमको भावों से पुण्य नहीं मिलेगा !!

मुनि श्री सुधासागर जी

नेता नीति बना सकता है,
पर उसका Implementation जनता की नीयत तय करेगी ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

(धर्म के क्षेत्र में भगवान नीति बनाते हैं, गुरु बताते हैं, मैं 75 वर्ष से सुन रहा हूँ पर implementation की 75% नीयत भी नहीं बन पा रही)

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