सत्य दुनिया को बदल सकता है,
पर सारी दुनिया मिलकर भी सत्य को नहीं बदल सकती ।
भगवान महावीर ने खुद के दर्शन करने को नहीं कहा, पूजादि करने को भी बाद में कहा; पहले खानपान की शुद्धता पर जोर दिया; जो जिंदा रखता है तथा ग़लत भोजन बीमारियाँ पैदा करता है । भोजन में भी पहले सामिष छोड़ने को कहा ।
धर्म पहले सावधान करता है, कर्म/ कोरोना वही सावधानियां बाद में करता/ करने को मजबूर कर देता है ।
मुनि श्री सुधा सागर जी
चोट लगे (स्थान) में चोट बहुत पीड़ा देती है ।
बुरे समय में किसी से उलझें नहीं, सावधानी बहुत रखें ।
(कोरोना भी तो हम सबके बुरे समय का परिणाम है, इससे उलझें/ डरें नहीं; बस सावधानी बहुत रखें)
मुनि श्री सुधासागर जी
Tension is who you think you should be.
Relaxation is who you are.
जीव रक्षा क्यों, आत्मा तो कभी मरती नहीं ?
ताकि मनुष्यादि अपना आत्मकल्याण करके दु:खों से मुक्ति पा सकें ।
पर कीड़े-मकोड़े/पेड़-पौधे तो आत्मा को जानते भी नहीं, तो कल्याण कैसे करेंगे ?
असहाय की रक्षा करके, दया के भावों से अपना आत्मकल्याण कर सकते हैं न !
आचार्य श्री विद्यासागर जी
कर्म किया जाता है, धर्म धारण करते हैं,
कर्म करने से धर्म बना रहता है ।
साधु बिना कर्म किये हुये भी धर्म बनाये रखते हैं/बढ़ाते भी जाते हैं ।
गुरु/भगवान को जब नाव बना लिया फिर तनाव कैसा ?
मनुष्य यंत्रों की सहायता लेकर भी भटक जाता है ।
पक्षी हजारों किलोमीटर बिना यंत्रों के अपने गंतव्य पर पहुँच जाते हैं, क्योंकि वे लीक/परम्परा पर चलते हैं ।
रोगों के आने के रास्तों को बंद करना ही आरोग्यता है ।
रास्ते बंद करने का तरीका ?
मन,वचन,काय की पवित्रता से ।
आचार्य श्री विद्या सागर जी

(अरुणा)
धर्म-चर्चा से जरूरी नहीं कि आप आगे बढ़ेंगे,
पर इतना अवश्य है कि आप पीछे नहीं जायेंगे ।
सुखाभास (सांसारिक/इंद्रिय सुखों को सुख मानना) की तरह दुखाभास भी होता है ।
दुखाभास =
1. दुखों को ओढ़ लेना
2. इच्छित वस्तु का ना मिलना
धागे के अहम् को बनाये रखने के लिये मोम अपना सर्वस्य दे देता है, फिर भी धागे का वहम् समाप्त नहीं होता, हम इनसे दूर कैसे रहें ?
“मैं” बुरा नहीं, आवश्यक है;
“मैं कुछ हूँ” का वहम् बुरा है ।
वहम् ही अहम् को पैदा करता है ।
“अर्हम्” को पहचान लो तो वहम् भी नहीं और अहम् भी नहीं ।
पूजा/आहार में शुद्ध धोती-दुपट्टा पहनने से बाह्य शुद्धता के साथ साथ अंतरंग शुद्धता/शक्ति बढ़ जाती है ।
जैसे पुलिस वाला यदि सादा कपड़ों में हो और उससे झगड़ा किया तो कम सज़ा, पर वही यदि वर्दी में हो तो !
मुनि श्री सुधा सागर जी
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments